kalyug ke Ram ki Agni Pariksha
पिताजी बहुत ही सरल और मधुर स्वभाव के थे। उनकी दरिया दिली का हर कोई फायदा उठाते थे। मुश्किलों के दौर में जिसे भी अपना समझा वे सब दगा बाज़ निकले। पिताजी के भाई की मृत्यु के बाद उनका सारा क़र्ज़ा पिताजी ने चुकाया अपने दोस्तों से उधार लेकर, एवज में गाँव के बंगले के कागज़ रखने पड़े।
मेरे बड़े भाई का काल टला ही था कि जिस इमारत में पिताजी की दूकान थी वहाँ के मालिक ने पिताजी पर झूठा मुकदमा लगा दिया कि उन दुकानों का सिर्फ टोकन रुपए जमा किए गये हें , पगड़ी नहीं भरी। किस्मत के मारे पिताजी एक वक़ील के पास गए। वह कहते है ना कि मुसीबत जब आती है तो चारों ओर से आती है। वही हाल पिताजी के साथ भी हुआ। वह वक़ील बईमान निकला। सालों तक मुकदमा खींचता रहा और आखिर में हार गए।
इसमें हम बच्चों के बीमा के सारे पैसे इस्तेमाल हो गए।
शादी की तैयारी के लिए कोई पैसे नहीं बचे थे। तो हम दोनों बेटियों के ससुराल वालों को साल भर बाद शादी करने को कहा। लेकिन उन्होंने पैसे उधार देने का प्रस्ताव रखा। पिताजी ने प्रस्ताव स्वीकार कर , आगे की तैय्यारियाँ शुरू कर दी। पिताजी के व्यापार बाजार में बात फैली कि दो दो बेटियों की शादी करने के लिए पैसे हैं लेकिन उधार चुकाने के लिए नहीं है। तो सारे दोस्तों ने एक साथ पैसे माँगने शुरू कर दिए। अपनी सच्चाई साबित करने के लिए तंग आकर पिताजी ने अपनी दूकान के बाहर अपने शरीर पर जनरेटर का केरोसीन डाल दिया और माचिस से आग जलाने ही वाले थे कि उनके शुभ चिंतक ने बचा लिया।
कैसा घोर कलयुग आगया था, हर एक दोस्त ने सिर्फ २ लाख रुपये उधार दिए थे लेकिन ब्याज का भी ब्याज जोड़ कर ७ लाख मांग रहे थे। ऐसे लोगों के सामने पिताजी को जीवन की अग्नि परीक्षा देनी पड़ी। मुझे तो इन सब बातों के बारे में माँ ने कुछ नहीं बताया। मैंने शाम को देखा कि पिताजी की आँखें लाल लाल थी और नीबू की तरह गोल फूली हुयी थी। चेहरा भी सूजा हुआ दिख रहा था। माँ ने कहा कि पानी का नल टूट गया था और इसलिए सारा पानी आँखों में भर गया था। मैंने उनकी बातों पर यकीन कर लिया था। शादी के १५ दिन बाद माँ ने मुझे सच्चाई बताई। आज उस पल को कोसती हूँ , क्यों मैं शादी के लिए मान गई। अच्छा होता अगर मैं उस आँगन में हमेशा रहती , तो कम से कम उनका भाग्य शुभ रहता , बदकिस्मती अपना रुख मोड़ लेती।
मेरे बड़े भाई का काल टला ही था कि जिस इमारत में पिताजी की दूकान थी वहाँ के मालिक ने पिताजी पर झूठा मुकदमा लगा दिया कि उन दुकानों का सिर्फ टोकन रुपए जमा किए गये हें , पगड़ी नहीं भरी। किस्मत के मारे पिताजी एक वक़ील के पास गए। वह कहते है ना कि मुसीबत जब आती है तो चारों ओर से आती है। वही हाल पिताजी के साथ भी हुआ। वह वक़ील बईमान निकला। सालों तक मुकदमा खींचता रहा और आखिर में हार गए।
इसमें हम बच्चों के बीमा के सारे पैसे इस्तेमाल हो गए।
शादी की तैयारी के लिए कोई पैसे नहीं बचे थे। तो हम दोनों बेटियों के ससुराल वालों को साल भर बाद शादी करने को कहा। लेकिन उन्होंने पैसे उधार देने का प्रस्ताव रखा। पिताजी ने प्रस्ताव स्वीकार कर , आगे की तैय्यारियाँ शुरू कर दी। पिताजी के व्यापार बाजार में बात फैली कि दो दो बेटियों की शादी करने के लिए पैसे हैं लेकिन उधार चुकाने के लिए नहीं है। तो सारे दोस्तों ने एक साथ पैसे माँगने शुरू कर दिए। अपनी सच्चाई साबित करने के लिए तंग आकर पिताजी ने अपनी दूकान के बाहर अपने शरीर पर जनरेटर का केरोसीन डाल दिया और माचिस से आग जलाने ही वाले थे कि उनके शुभ चिंतक ने बचा लिया।
कैसा घोर कलयुग आगया था, हर एक दोस्त ने सिर्फ २ लाख रुपये उधार दिए थे लेकिन ब्याज का भी ब्याज जोड़ कर ७ लाख मांग रहे थे। ऐसे लोगों के सामने पिताजी को जीवन की अग्नि परीक्षा देनी पड़ी। मुझे तो इन सब बातों के बारे में माँ ने कुछ नहीं बताया। मैंने शाम को देखा कि पिताजी की आँखें लाल लाल थी और नीबू की तरह गोल फूली हुयी थी। चेहरा भी सूजा हुआ दिख रहा था। माँ ने कहा कि पानी का नल टूट गया था और इसलिए सारा पानी आँखों में भर गया था। मैंने उनकी बातों पर यकीन कर लिया था। शादी के १५ दिन बाद माँ ने मुझे सच्चाई बताई। आज उस पल को कोसती हूँ , क्यों मैं शादी के लिए मान गई। अच्छा होता अगर मैं उस आँगन में हमेशा रहती , तो कम से कम उनका भाग्य शुभ रहता , बदकिस्मती अपना रुख मोड़ लेती।
Very emotional...Life is ups and downs....
ReplyDeletesituations provoke human beings to take hard steps to face life
DeleteVery emotional And nicely written. Anuta, is this some biography that you are writing or series of fiction.
ReplyDeleteThankyou. Its about the girl without freedom (Bird without wings)(can say biography)
Delete