sanjeevani davaaiyan
सुना था कि भगवान उसी की परीक्षा लेते रहते है जो सक्षम होता है। लेकिन मैंने माँ , पिताजी, भैया और दीदी को भी मेरे साथ साथ परीक्षा देते हुए देखा था। बहुत उब चुके थे ज़िन्दगी से सब ,पता नहीं कब ख़त्म होगा उतार चढ़ाव का खेल। डॉक्टर साहिबा ने एक लम्बी सी पर्ची दी दवाइयाँ लाने के लिए , मगर पिताजी ने सोचा एक दो दिन में पैसों का इंतजाम हो जाएगा तब इकहट्टी ले आयेंगे दवाई। रात भर दर्द से रोती रही जैसे कोई हाथी के पैरों से रौंदी गयी हो। न मुझे पता था ना घरवालों को कि उस सूची में एक दर्द सुन्न करने की दवाई भी थी जो डॉक्टर साहिबा ने पहले लाने को कहा था। घर में किसी को भी पहले किसी बड़े ऑपरेशन का अनुभव नहीं था तो तकलीफ़ सहन करनी पड़ी, क्यों की उन दिनों मेडिकल स्टोर रात भर नहीं खुले रहते थे। एक भली नर्स ने मुझे नींद का इंजेक्शन लगा दिया और मैं सो गयी। अगले दिन सुबह दर्द भयंकर हो गया। पिताजी दौड़े दवाई लाने , मगर दुकान देर से खुलती थीं। दोपहर के बारह बजे तक सारी दवाईयाँ ले आये और हर पल मेरे पास ही बैठे रहे। भैया बच्ची के कागज़ी काम में लगे हुए थे। माँ और दीदी बच्...