kismat ko nazar lag gayi....
ऑर्लैंडो की बड़ी कम्पनी में काम करना किस्मत की देन थी। कहा जाता है किस्मत का मौका बस एक बार सामने आता है , तुरन्त अपना लिया तो आपका वरना किसी और का हो जाता है, क्योंकि वह किसी का मोहताज नहीं रहता। लेकिन बदकिस्मती तब तक नहीं टलती जब तक कुछ विनाश न करदे। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। मेरी किस्मत को पता नहीं किसकी नज़र लग गयी थी। नई नौकरी को सिर्फ ४ ही महीने हुए थे कि ससुराल वालों का एक फ़ोन आया , जिसने मेरी दुनिया बदल दी।
मेरी छोटी नन्द का गौना होना था. जिसके समारोह में मेरा उपस्थित रहना अति ज़रूरी था। मैंने बहुत मना किया था कि आना मुश्किल है, अभी नयी नयी नौकरी है, मगर वे अपनी ज़िद्द पे अड़े रहे। मानसिक रूप से प्रभावित करने लगे कि उनके घर का यह आखरी मौका है कुँवारी माँग जाने का, इसलिए चाहे जो हो सके करके गाँव जाना होगा।
उधर ऑफिस में मैनेजर ने छुट्टी देने से इनकार कर दिया यह कह कर की ६ महीने नौकरी करने के बाद ही छुट्टी माँगने के हक़दार है। ऑफिस वालों ने बहुत समझाया मुझे की ज़िन्दगी भर कोई न कोई तो समारोह होता रहेगा, फिर कभी शामिल हो जाना , अभी ६ महीने का टारगेट पूरा करलो।
मैंने ससुराल वालों को ऑफिस की स्थिति बताई , लेकिन माने नहीं , नौकरी छोड़ देने का फरमान सुना दिया। कहा नौकरियाँ बहुत मिल जाएगी ज़िन्दगी में, लेकिन रिश्तेदारी का मौका बार बार नहीं आता। आखिर कार मजबूरी में नौकरी छोड़ गाँव चली गयी। परिवार के सभी लोग खुश थे , तो मुझे लगा शायद यही सही निर्णय था उस परिस्थिति के लिए। कई दिनों तक आपने आपको सान्तवना देती रही। पता नहीं किस्मत के पिटारे में आगे और क्या क्या अनजाने मोड़ छुपे थे। आज की तारिक में उस दिन के लिए फ़ैसले पर बहुत अफ़सोस करती हूँ। क्योंकि अब यकीन होने लगा कि बदकिस्मती तब तक दरवाज़ा खट खटाती रहती है जब तक हम खोल न दे , यानि जब तक वह सत्यनाश न करदे। इसलिए सभी से निवेदन है कि ज़िन्दगी का हर कदम सोच समझ कर ले।
Learning from mistakes...and never ever repeat it...but always be hopeful... opportunity knocks the door...
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