maa ki mamta ka mol
ज़रा सोचो कि आप एक प्यारा सा सपना देख रहे हो, और आपकी आँख खुलने से सपना टूट जाए , तो कैसा लगेगा। वही हाल था मेरा भी। सब रिश्तेदार अपने अपने घर लौट गए थे। पतिदेव भी ड्यूटी पे पहुंच गए थे। घर खाली खली लग रहा था। रह रह कर अपनी पक्की सहेली की कही हुई बात याद आ रही थी कि मैं इतनी बातूनी हूँ तो मेरा ससुराल ऐसा मिलेगा, जहाँ मेरी बोलती बंद हो जायेगी। उसकी यह बात सच साबित हुई। उस वक़्त उस घर में कोई मुझसे बात करने वाला नहीं था। और राजस्थानीयों में बहु अपनी सासूमाँ से भी बात नहीं कर सकती थी।
उन दिनों मोबाइल में रोमिंग नहीं करते थे , इसलिए बस लैंड लाइन का ही सहारा था। घंटों दुआ करती थी कि काश मेरे माता पिता या मेरे पति का कॉल आजाए। आधा दिन गुजरने के बाद जब एक घंटी बजी तो ख़ुशी के मारे फ़ोन अटेंड करने जा ही रही थी कि माताजी ने फ़ोन उठाया और अपनी पड़ोसिन से बातें करने लगे।मेरी शादी को एक ही हफ्ता हुआ था और मैं घर के कामों में लग गयी थी। फ़ोन पे माताजी कि कही हुई बात सुनकर मेरा ह्रदय दुःखी हो गया। उन्होंने अपनी पड़ोसिन को कहा कि वे मुझे सजावटी अलमारी में बिठाने के लिए नहीं लाये थे, काम तो करना पड़ेगा।
अधिकतर यही सुना गया था कि नव वधु की मेहन्दी का रंग जब तक नहीं छूटता , तब तक घर का कोई काम नहीं करवाते है , लेकिन मुझे तो पूरा घर संभालना पड रहा था। माताजी की बातें सुनकर बहुत रोना आ रहा था। तब माँ की ममता का मोल समझ में आया। माताजी के रूखे व्यव्हार के बारे में सोचा तो ज्ञात हुआ कि माताजी ने मन ही मन मुझसे कुछ दहेज़ की अपेक्षा की थी जो हासिल नहीं हुई , ऊपर से आनन् फानन में शादी बिना सजावट वाले मंजिल पर , बेढंग तरीके से होने के कारण नाराज़ थे। तभी उनके दिल की बात ज़बान पर आ गयी।
सोच रही थी कि लिखने वाले ने तो लिख डाली किस्मत मेरी , मगर यह नहीं बताया कि माँ और पिता के होते हुए भी अनाथ की तरह कैसे जीना होगा।
उन दिनों मोबाइल में रोमिंग नहीं करते थे , इसलिए बस लैंड लाइन का ही सहारा था। घंटों दुआ करती थी कि काश मेरे माता पिता या मेरे पति का कॉल आजाए। आधा दिन गुजरने के बाद जब एक घंटी बजी तो ख़ुशी के मारे फ़ोन अटेंड करने जा ही रही थी कि माताजी ने फ़ोन उठाया और अपनी पड़ोसिन से बातें करने लगे।मेरी शादी को एक ही हफ्ता हुआ था और मैं घर के कामों में लग गयी थी। फ़ोन पे माताजी कि कही हुई बात सुनकर मेरा ह्रदय दुःखी हो गया। उन्होंने अपनी पड़ोसिन को कहा कि वे मुझे सजावटी अलमारी में बिठाने के लिए नहीं लाये थे, काम तो करना पड़ेगा।
अधिकतर यही सुना गया था कि नव वधु की मेहन्दी का रंग जब तक नहीं छूटता , तब तक घर का कोई काम नहीं करवाते है , लेकिन मुझे तो पूरा घर संभालना पड रहा था। माताजी की बातें सुनकर बहुत रोना आ रहा था। तब माँ की ममता का मोल समझ में आया। माताजी के रूखे व्यव्हार के बारे में सोचा तो ज्ञात हुआ कि माताजी ने मन ही मन मुझसे कुछ दहेज़ की अपेक्षा की थी जो हासिल नहीं हुई , ऊपर से आनन् फानन में शादी बिना सजावट वाले मंजिल पर , बेढंग तरीके से होने के कारण नाराज़ थे। तभी उनके दिल की बात ज़बान पर आ गयी।
सोच रही थी कि लिखने वाले ने तो लिख डाली किस्मत मेरी , मगर यह नहीं बताया कि माँ और पिता के होते हुए भी अनाथ की तरह कैसे जीना होगा।
Oooo..sad story. I understand that would bw true for somw people.
ReplyDeletelife is mysterious, still many chapters lie unfold
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