prabhu ka sahara milta raha
लगातार जीतने के कारण अध्यापकों को लगता था कि मैं आई ए एस की तैयारी कर रही होंगी। पता नहीं उनको यह गुमान क्यों था मेरे प्रती। जो भी हो , सुनकर बाढ़सा अच्छा लगता था।
मेरे फाइनल इयर की परीक्षा के दौरान मेरे बड़े भाई की शादी थी। घर में ख़ुशी का माहौल था और में किताबों में डूबी हुई थी। एक मन किया कि भाई की शादी बार बार नहीं होगी तो थोड़ा उस पल को जिया जाए , लेकिन दिमाग ने ऐसा करने से रोका , क्योंकि माँ , दीदी , भैया , दोस्तों की उम्मीदें मुझसे जुडी हुई थी। तब मैंने शादी की तैयारियों में हाथ बटाने के बदले पढ़ना ज़रूरी समझा , वैसे भी मेरी आगे की पढ़ाई को लेकर सबने यही वादा किया था उनके हिस्से की पढ़ाइ मैं करूंगी और मेरे हिस्से का काम घर के बाकी लोग करेंगे।
प्रभु की महीमा से प्रॉजेक्ट का वाई वा ५ दिन के लिए पोस्ट पोन हो गया। पहली बार बड़े शहर से गाँव अकेले चल पड़ी। उन दिनों ट्रैन का सफर २ दिन का था। सब खुश थे मेरे आने से , लेकिन मेरी तबीयत ख़राब हो गयी। जैसे तैसे फेरों पे पहुंची , और अगले दिन रिसेप्शन में शामिल होकर वापस लौट गई। सबने छेड़ा कि विशेष अतिथि है , मैंने कहा परीक्षा के बीच से आना विशेष ही तो है।
किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि ऐसी परिस्थितियों में कोई अव्वल आ सकता है। जी हाँ , मैंने बीबीएम फाइनल इयर कॉलेज में टॉप किया था। मेरे और द्वितीय स्थान में २०% का फांसला था। मुझे भी विश्वास नहीं हो रहा था कि सभी विषयों में मैं ही अव्वल थी। दोस्त से किया वादा पूरा कर दिखाया। परिवार जन भी बहुत खुश हुए।
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