pyar ka khazana
स्टेशन पर दोनों भाई मुझे लेने पहुंच गए थे जैसे कोई मुख्य अतिथि को लेने आये हो। ऐसा लगना वाजिब भी था क्योंकि छोटे भाई के जनम के बाद घर में सालों बाद किलकारी गूँजने वाली थी। ज़्यादातर सभी लोगों को नन्हे बच्चे बहुत प्रिय लगते हैं। ख़ास करके मेरे बड़े भैया को तो बच्चियों से बहुत लगाव है , इसलिए वे दुआ करते थे कि उनकी संतान एक बेटी हो।
घर पहुंच कर सबने बहुत सारी यादें ताज़ा की। माँ के हाथ का खाना खाके बेहद संतुष्टि हुई। रोज़ शाम को ,बारी बारी से पिताजी और बड़े भैया व छोटा भाई , मेरे पैरों की मालिश किया करते थे। मेरी सूजन को देखकर उनको मेरी चिंता अधिक होने लगी। जाँच करवाने पर पता चला कि बी.पी अधिक बढ़ा हुआ था। इसको नियंत्रित करने के लिए दवाई ली।
वे दिन ज़िन्दगी के बेहद खुशनुमा दिन थे , ऐसा लगता था जैसे एक अर्सा बीत गया हो आराम किये , जो मायके में सारी तमन्नाएँ पूरी हो गयी। मेरा वज़न ४ किलो बढ़ गया था केवल एक ही हफ्ते में। लेकिन मेरी किस्मत कभी आसान सफर पर नहीं ले जाती। आगे की कल्पना किसीने नहीं की थी। तब तक दीदी का फ़ोन आया कि वह भी माँ बनने वाली थी। उनके शुरुवाती दिन थे तो माँ ने उन्हें मायके बुलवा लिया।
तक़दीर का खेल देखो , बड़ी भाभी के माँ बनने की ख़ुशी में उनको बधाई भी नहीं दे पायी क्योंकि वे अपने मायके डिलीवरी के लिए गयी हुई थी , न ही दीदी के साथ ख़ुशी मना सकी क्योंकि जब तक उनसे मिलन हुआ तब तक मेरी हालत और बिगड़ गयी थी।
माताजी ने माँ को कहा था मुझे केसर का दूध पिलाने के लिए। यहाँ थोड़ी गड़बड़ हो गयी। माँ तो सिर्फ तीसरी कक्षा तक पढ़ी थी , और पहले कभी केसर का दूध भी नहीं बनाया था , तो हलवाई की तरह केसर दूध में डाल कर बहुत देर तक खौलाया और फिर मुझे पिलाया। जिससे बी.पी और बढ़ गया। इसलिए रोटी सिर्फ खीरा से खाती थी।
कुछ ही दिनों में दीदी भी घर पहुंच गयी थी। घर स्वर्ग लगने लगा था , जहाँ सब प्यार का खज़ाना लुटा रहे थे। भले ही पैसों की बहुत तंगी थी , मगर दिल से सब अमीर थे।
Very nicely expressed..
ReplyDeletetq, but i dont think much, words just flow when i share the feelings...
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