shikaayatein.....

तारीफ़ों का दौर कहीं पीछे छूट गया था। अब तो शिकायतों का दौर शुरू हुआ था। अस्पताल में तो लोग बच्ची के रोने की आवाज़ से परेशान थे ही ,धीरे धीरे पड़ोसी और घरवाले भी परेशान होने लगे। 

जिस दिन घर पहुंचे थे उसी रात मकान मालिक घर आकर बोले उनकी तबियत ठीक नहीं , बच्ची के रोने के शोर से आराम नहीं कर पा रहे थे।  पिताजी  ने पालने की डोरी को अपने पैर के अँगूठे पर बाँध दिया और सारी रात सोते सोते अपना पैर हिलाते रहे ताकि बच्ची झूलते झूलते सो जाए। 

जब पिताजी घंटों ऐसे करते करते थक जाते तो माँ बच्ची को अपने सीने पे उल्टा लिटा कर हिलाती रहती। जब वह थक जाती तो छोटा भाई बच्ची को पालने में सुलाकर ख़ुद ज़मीन पर सो जाता और पालने को नीचे से अपनी हथेली से ऊपर नीचे करता जाता , मानो वह जिम में कसरत करता जा रहा था जब तक वह थक नहीं जाता। 

इन सब में दीदी कहाँ पीछे रहने वाली थी , वह भी बच्ची को लेकर पूरे घर में परेड करती, जबकि वह गर्भवती थी। बड़े भैया ने भी अपना योग दान दिया। उन्होंने पालना टीवी के पास रख दिया और टीवी की आवाज़ करके पालने को झुलाते रहे , फ़िर झुलाते झुलाते वही सोफ़े पे ही सो जाते थे। न किसी को वक़्त का होश न पहने ओढ़ने का ध्यान। सभी बस बच्ची को चुप कराने में मग्न थे। आख़िर कार फिर से सुबह के अज़ान की आवाज़ को सुनकर बच्ची सो गयी। तब जाके सारे घर वालों ने थोड़ी बहुत नींद ली। 

इतने जतन करने पर भी मकान मालकिन सुबह उठते ही घर आकर बोली , आपकी नातिन तो खारी कलडी रोती है पूरी रात। और एक टोटका भी बता कर चली गई कि एक रुपए के सिक्के को नाभि पर चिपका दो , एक महीने में सब ठीक हो जाएगा। लेकिन ऐसे कई नुस्खें आज़माएँ , कुछ फायदा नहीं हुआ। 

सामने घर में रहने वाले दंपति ने भी कपड़े सुखाते वक़्त बच्ची के बारे में पूछ ताछ की। हर किसी का रोज़ एक ही सवाल कि क्या हुआ बच्ची को , क्यों चुप नहीं होती। 

वह ज़माना अति उत्तम था।  सारे पड़ोसी सुख दुःख में साथ होते थे। मगर अब के दौर में ,भले ही किसी के भी बच्चे का रोना सुनाई दे, तब भी यही कहेंगे जाने दो , उनका बच्चा है वे खुद संभाल लेंगे। ....... 

वे बीते दिन याद हैं , वे पलछिन याद हैं , बिताये ऐसे बच्ची के संग जो, हर मंज़र याद है। 

Comments

  1. True..lekin chhote shaharon me log abhi bhi concern rkhte hain.

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    1. fortunate are those staying in villages and small cities, urbanisation has made metrocity people more reserved.

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