adhikaari abhi neend mein hain
शहरों की चका चौंध में सब तरक्की की गुमाँ में हैं।
अपनी अपनी नीजी ज़िन्दगी की जुस्तजू में हैं।
यह ऐसा जहान है जहाँ सबका जिस्म जागा हुआ है मग़र , ज़मीर नींद में है।
अगर किसी को ज़रा सा भी वक़्त मिल जाए तो दूसरों की , कमियाँ ढूंढ़ने में है।
एक सवाल हर बार जागा हुआ है , मगर जवाब नींद में है।
अभी निर्दय ज़माने की हैवानियत से बेख़बर, जाने कितनी ही बच्चियाँ, हवस के शिकारी घेरों में हैं।
सुलग रही है मेरे दिल में इन्तक़ाम की हज़रत ,और समाज चेहरे पे नक़ाब डाले , नींद में है।
बहूतों के मन में इंक़लाब उठता है देखके दरिंदों की दरिंदगी ,
कब मिलेगा इन्साफ़, यही सवाल हर कन्या के मन में कब से जागा हुआ है.......
मगर प्रषासन अभी तक नींद में है।
शायद बड़ी बड़ी हस्तियों के साथ ऐसी हैवानियत होती नहीं,
इसीलिए सभी अपने अपने आराम गृह में , सुकून की नींद में हैं।
सवाल हर लड़की की सुरक्षा का अभी भी जागा हुआ है ,
मगर मौत का फर्मान सुनाने वाले अधिकारी , अभी तक भी नींद में है।
अपनी अपनी नीजी ज़िन्दगी की जुस्तजू में हैं।
यह ऐसा जहान है जहाँ सबका जिस्म जागा हुआ है मग़र , ज़मीर नींद में है।
अगर किसी को ज़रा सा भी वक़्त मिल जाए तो दूसरों की , कमियाँ ढूंढ़ने में है।
एक सवाल हर बार जागा हुआ है , मगर जवाब नींद में है।
अभी निर्दय ज़माने की हैवानियत से बेख़बर, जाने कितनी ही बच्चियाँ, हवस के शिकारी घेरों में हैं।
सुलग रही है मेरे दिल में इन्तक़ाम की हज़रत ,और समाज चेहरे पे नक़ाब डाले , नींद में है।
बहूतों के मन में इंक़लाब उठता है देखके दरिंदों की दरिंदगी ,
कब मिलेगा इन्साफ़, यही सवाल हर कन्या के मन में कब से जागा हुआ है.......
मगर प्रषासन अभी तक नींद में है।
शायद बड़ी बड़ी हस्तियों के साथ ऐसी हैवानियत होती नहीं,
इसीलिए सभी अपने अपने आराम गृह में , सुकून की नींद में हैं।
सवाल हर लड़की की सुरक्षा का अभी भी जागा हुआ है ,
मगर मौत का फर्मान सुनाने वाले अधिकारी , अभी तक भी नींद में है।
Amazing writing...
ReplyDeleteJust wrote down as felt thinking of the contradictions of the social life of common man
DeletePainful...and feeling same
ReplyDeleteHmm.... Thinking when sentence to Death be amended to reduce such crimes...
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