paaras mani
पारस मणि को कभी देखा तो नहीं , हाँ मगर एक पारस तुल्य इंसान को देखकर निःशब्द हो गई। अस्पताल से आने के बाद अगले दिन सुबह बच्ची को पीलिया का इंजेक्शन लगवाना था। बड़े भैया , मैं और दीदी बच्ची को लेकर घर से निकले। ३ मंज़िला इमारत में कोई लिफ्ट की सुविधा नहीं थी। ऑपरेशन के टाकों में दर्द के साथ चढ़ना उतरना पडता था। नीचे गेट पर पहोंच कर मैं भैया की ऐन्टैसर बाइक ढूंड रही थी चलने के लिए , मगर भैया ने रिक्शा बुक कर लिया था। रिक्शा में बैठकर मैंने भैया से कहा पास के ही क्लिनिक में जाने के लिए रिक्शा बुक करने की ज़रुरत नहीं थी। आप अपनी बाइक पे दो बारी में मुझे और दीदी को एक एक करके ले जाते। भैया ने कहा अभी कुछ दिनों तक रिक्शा में जाना सही रहेगा। क्लिनिक पहुंचने के बाद जब बच्ची के कनोला में इंजेक्शन डालने लगे तो भैया से देखा नहीं गया, और वे बाहर जा खड़े हुए। जब फीस देने लगे तो भैया इशारे में डॉक्टर साहब को कुछ कह रहे थे। दीदी मुझे लेकर बाहर आगई। तब तक मैंने दीदी से पुछा की भैया की मोटर साइकिल नहीं दिख रही थी पार्किंग में , कहाँ रखी है उन्होंने। तो दीदी ने बताया शायद सर्विस के लिए दी होगी। ...